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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 3, ISSUE 2 (2022)
स्वामी विवेकानंद और महिला सशक्तिकरण
Authors
अंजलि शर्मा
Abstract
महिलाएं हमेशा से ही पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवथाओं को संरक्षित रखने की एक महत्वपूर्ण आधारशिला थी, हैं और हमेशा रहेंगी । किन्तु आज भी हमारे राष्ट्र एवं समाज में महिलाओं की स्थिति जितनी सशक्त और प्रभावशाली होनी चाहिए वह अभी भी पूर्ण रूप से से नहीं हो पाई हैं, आज भी उनकी स्थिति पुरुषों की तुलना में निम्नतर बनी हुई हैं। भारतीय संविधान जिसमें महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हैं फिर भी उसका उत्पीड़न किया जा रहा है। आज भले ही हम 21 वीं सदी में पहुँच गए हो लेकिन स्त्रियों के प्रति हमारी मानसिकता हजारों साल पुरानी ही बनी हुई हैं। इस शोध आलेख में स्वामी विवेकानंद के महिलाओं से संबंधित विचाओं को प्रस्तुत किया गया हैं। विवेकानंद का मानना हैं कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सर्वोत्तम थर्मामीटर हैं, महिलाओं की स्थिति । हमें महिलाओं को ऐसी स्थिति में पहुंचा देने चाहिए,जहां वह अपनी समस्याओं को अपने ढंग से स्वयं सुलझा सकें। हमें महिला शक्ति के उद्धारक नहीं,वरन उनके सेवक और सहायक बनाना चाहिए।
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Pages:1-3
How to cite this article:
अंजलि शर्मा "स्वामी विवेकानंद और महिला सशक्तिकरण". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 3, Issue 2, 2022, Pages 1-3
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