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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 3, ISSUE 2 (2022)
दिनकर के काव्य में शिल्प – विधान
Authors
डॉ. कोंडा चन्द्रा
Abstract
यह एक बहुदा उद्धृत उक्ति ही कही जाएगी कि कथ्य अपना शिल्प स्वयं ही निर्धारित करता है। दिनकर का कथ्य उनका जीवन था। प्रत्येक रचनाकार के लिए यही सच है। उनका जीवन तात्पर्य उनका व्यक्तिगत जीवन कभी नहीं होता। दिनकर के लिए कविता हमेशा अपने को प्रभावशाली रूप में पहचानने का साधन रही है। दिनकर का साहित्य दर्शन एक स्तर पर तो उनके व्यक्तित्व का प्रकटन रहा है।
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Pages:20-22
How to cite this article:
डॉ. कोंडा चन्द्रा "दिनकर के काव्य में शिल्प – विधान". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 3, Issue 2, 2022, Pages 20-22
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