Logo
Sanskritik aur Samajik Anusandhan
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
परिवर्तनशील संस्कृति में निहित शाश्वतता
Authors
आशा रानी
Abstract
संस्कृति हमारी अमूल्य, अतुलनीय और अद्भुत धरोहर है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा सुदीर्घ समय में संचित अनुभवों से निर्मित उपहार है। हमारे हित, उपयोगिता और व्यवस्था की हर कसौटी पर खरी उतरने के पश्चात् ही इसका हर अंश, हर पहलु इसके भव्य रूप का हिस्सा बना है। फिर भी समय के साथ परिस्थितियों, आवश्यकताओं और दृष्टिकोण में अंतर के कारण संस्कृति में आंशिक परिवर्तन स्वभावतः आते रहते हैं। लेकिन मूल रूप में यह शाश्वत है और इस शाश्वतता को बनाए रखना और इसका सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है। हमारी संस्कृति में निहित यह शाश्वतता का गुण ही उसे विश्व की अन्य संस्कृतियों से श्रेष्ठतम बनाता है। इन शाश्वत तत्वों से जुड़कर हम अपने पूर्वजों का सम्मान कर पाते हैं, उनके अनुभवों से लाभान्वित हो पाते हैं, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अनेक समस्याओं को उत्पन्न होने से रोक पाते हैं और विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना पाते हैं।
Download
Pages:3-4
How to cite this article:
आशा रानी "परिवर्तनशील संस्कृति में निहित शाश्वतता". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 3-4
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.