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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
प्रेमचंद-साहित्य की सोदेदश्ता
Authors
आशा रानी
Abstract
साहित्य शिरोमणि युग प्रवर्तक प्रेमचंद जी का साहित्य मात्रा मनोरंजन के लिए नहीं वरन् सोद्देश्य लिखा गया साहित्य है। यह उद्देश्य है- समाज-सुधार। समाज के हर वर्ग पर प्रेमचंद जी की नजर थी। चाहे वह किसान हो, मजदूर हो, नारी हो, ग्रामीण हो या नगर का निवासी हो। सभी के जीवन में व्याप्त समस्याओं का प्रतिपादन कर पाठकों का ध्यान आकर्षित करने की चेष्टा की गई है। प्रेमचंद जी के समय वाली गंभीरता के साथ ये ऋण, दहेज-प्रथा, श्रमिकों का शोषण, बेरोजगारी, जैसी अनेक समस्याएँ समाज के विकास में बाधक हैं। ऊपर से बेहतर व उन्नत दिखते समाज की आंतरिक परतों को ये समस्याएँ दीमक की तरह खोखला कर रही हैं। सुखी, समृद्ध व सभ्य नागरिकों वाला समाज ही एक आदर्श व उन्नत समाज बन सकता है। ऐसे ही समाज के निर्माण का स्वप्न लिए प्रेमचंद जी जनसामान्य की समस्याओं का चित्रण कर उनके समाधान के प्रति हमें सचेत करते हैं।
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Pages:5-7
How to cite this article:
आशा रानी "प्रेमचंद-साहित्य की सोदेदश्ता". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 5-7
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