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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
विवेकी राय की कहानियों में चित्रित ग्रामीण जीवन
Authors
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
Abstract
हमारे सामाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परस्पर विरोधी मूल्य एक-दूसरे से निरन्तर टकरा-टकरा कर टूट रहे हैं। साथ ही साथ ये समाज के ढाँचे को भी तोड़ रहे हैं। जिन्दगी के ग्राम-जीवन से जुड़ी कहानियों में ऐसे ही चित्र सामने आते हैं, जिनमें मूल्यों के घात-प्रतिघातों को उसके यथार्थ धरातल पर विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है और यह सामाजिक दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी एवं सही भी लगता है। ग्रामीण जीवन के कहानीकार डॉ0 विवेकी राय की कहानियाँ ग्राम जीवन के अनेक सन्दर्भों में रची-बसी है। गाँवों की अनेक समस्याओं को उन्होंने अपनी कहानियों में चित्रित किया है। समाज के किसी पक्ष को लिया जाये, चाहे वर्ग संघर्ष हो, चाहे जातीय समीकरण हो, चाहे और कोई पक्ष, सभी का बड़ा ही विश्वसनीय चित्रण कहानियों में देखा जा सकता है।
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Pages:14-20
How to cite this article:
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव "विवेकी राय की कहानियों में चित्रित ग्रामीण जीवन". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 14-20
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