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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
लोक मंगल की कसौटी पर काव्य का मूल्यांकन
Authors
डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव
Abstract
साहित्य शब्द अपने आप में में ही हित का भाव उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त होता है। यह हित मनुष्य की मनोदशा पर निर्भर करता है प यदि मनुष्य का स्वाभाव क्रूर है तो वह समाज में अनेक बुराइयाँ पैदा करेगा और उसमें संलिप्त भी होगा, जिससे समाज का नुकसान के साथ साथ प्रगति भी रुक जाएगी। इसीलिए साहित्य मनुष्य को एक अच्छा इन्सान बनाने के साथ उसके कार्यों को लोक कल्याण के रूप में प्रतिष्ठित करता है। परिणामतः मनुष्य प्राणी मात्र के प्रति करुनामय हो जाता है एवं लोक कल्याण हेतु समर्पित भी होता है प्यह दुस्तर कार्यसाहित्य लेखकों और आचार्यों को बड़े दायित्व और जिम्मेवारी के रूप में निभाना पड़ता है। जिसका सीधा सम्बन्ध मन की लोक मंगल की भावना से होता है, जिसकी कसौटी लोकमंगल के निकष से आंकी जाती है। जिस साहित्य में लोक मंगल का जितना सुन्दर भाव निहित होता है वह साहित्य उतना ही बड़ा साहित्य माना जाता है। यद्यपि कला कला के लिए का भी सिध्धांत है फिर भी कला मनुष्य के लिए ही सर्वाेपरि है प्प्रस्तुत शोध में विभिन्न साहित्य के माध्यम से लोक मंगल की कसौटी पर काव्य की उपादेयता को मनुष्य के हित में देखने का प्रयास किया गया है।
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Pages:21-22
How to cite this article:
डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव "लोक मंगल की कसौटी पर काव्य का मूल्यांकन". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 21-22
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