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VOL. 4, ISSUE 2 (2023)
नारी शक्ति का परिचय देती कहानी-’गदल’
Authors
डॉ. विजय श्रावण घुगे
Abstract
नारी का मतलब होता है महिला और संयम अर्थात शक्ति। इस शब्द का पूरा मतलब होता है की नारी पुरुष से अधिक शक्तिशाली होती है। शक्ति उपासना का भारतीय चिंतन में बहुत बड़ा महत्व है। शक्ति ही संसार का संचालन कर रही है। शक्ति के बिना शिव भी शव की तरह चेतना शून्य माना गया है। स्त्री और पुरुष शक्ति और शिव के स्वरूप ही माने गए हैं।
भारतीय उपासना में स्त्री तत्व की प्रधानता पुरुष से अधिक मानी गई है। नारी शक्ति की चेतना का प्रतीक है। साथ ही यह प्रकृति की प्रमुख सहचरी भी है जो जड़ स्वरूप पुरुष को अपनी चेतना प्रकृति से आकृष्ट कर शिव और शक्ति का मिलन कराती है। साथ ही संसार की सार्थकता सिद्ध करती है।
नारीवाद का स्वर जबसे गुँजने लगा तब से ही पूरी दुनिया में नारीयों के संदर्भ में लिख जाने लगा। आधुनिक युग में कई तरह के विमर्शाे ने हिंदी साहित्य में जगह बनाई, जौसे स्त्री-विमर्श, दलित-विमर्श, किन्नर विमर्श, दिव्यांग विमर्श, आदिवासी विमर्श तथा अन्यान्य विमर्शों ने साहित्यकारों, आलोचकों, पाठकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। इन विमर्शों में सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा तो श्स्त्री-विमर्शश्। अँग्रेजी में यह श्फ़ेमिनिज्मश् नाम से प्रचलित है। प्रारंभ में इसे नारीवाद कहा गया।
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Pages:1-2
How to cite this article:
डॉ. विजय श्रावण घुगे "नारी शक्ति का परिचय देती कहानी-’गदल’". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 2, 2023, Pages 1-2
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