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VOL. 5, ISSUE 1 (2024)
महादेवी वर्मा की काव्य संवेदना का एक विश्लेशणात्मक अध्ययन
Authors
प्रमिला
Abstract
महादेवी वर्मा छायावाद की एक प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं। छायावाद का युग उथल-पुथल का युग था राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक आदि सभी स्तरों पर विभ्रम, द्वंद्व संघर्ष और आन्दोलन इस युग की विषेषता थी।
महादेवी जी अपनी काव्य रचनाओं में प्रायः अंतर्मुखी रही हैं। अपनी व्यथा वेदना और रहस्य भावना को ही इन्होंने मुखरित किया है। उनकी कविता का मुख्य स्वर आध्यात्मिकता ही अधिक दिखायी देता है। यद्यपि उनका गद्य रचनाओं में उदार और सामाजिक व्यक्तित्व काफी मुखर है। उनकी कविताओं में उदात प्रेम का व्यापक चित्रण मिलता है। अलौकिक प्रिय के प्रति प्रणय की भावना नारी-सुलभ संकोच और व्यक्तिगत तथा आध्यात्मिक विरह की अनुभूति उनके प्रणय के विविध आयाम है। महादेवी की कविता में सौंदर्य के विविध रूपों का मनोहर चित्रण हुआ है। उनकी सौंदर्यानुभूति विलक्षण हैं। वह अपनी कविताओं में सौंदर्य के सूक्ष्म रूप का ही प्रतिष्ठित और चित्रित करती है। महादेवी वर्मा का सौंदर्य को ‘सत्य प्राप्ति को साधन’ मानती है और उनकी सौंदर्यानुभूति प्रकृति तथा मानव जीवन दोनों की ओर आकृष्ट होती है। जहां वह प्रकृति के विभिन्न रूपों में विराट सौंदर्य के दर्षन करती हैं वहीं नारी के विविध रूपों का भी उन्होंने चित्रण किया है।
छायावादी कवि चतुष्ठय में महादेवी वर्मा का महत्वपूर्ण स्थान हैं।
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Pages:3-4
How to cite this article:
प्रमिला "महादेवी वर्मा की काव्य संवेदना का एक विश्लेशणात्मक अध्ययन". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 5, Issue 1, 2024, Pages 3-4
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