ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 2 (2024)
फणीश्वर नाथ रेणु कहानियाँ एवं भारतीय ज्ञान परम्परा (लोक कला एवं संस्कृति के विशेष सन्दर्भ में)
Authors
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. दीपशिखा श्रीवास्तव
Abstract
भारतीय ज्ञान परम्परा का व्यापक संचित रूप में हिन्दी साहित्य में देखने मिलता है। हमारे साहित्यकारों ने अपने साहित्य के माध्यम से तत्कालीन ज्ञान को संजोया है, आज के वर्तमान समय में जब हम ज्ञान की परम्परागत तकनीकी पर व्यापक रूप से चित्तन एवं मनन कर रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में हमें हमारे साहित्य का भी व्यापक रूप से विश्लेषण एवं अध्ययन करने की महती आवश्यकता है। रेणु के कथा साहित्य के विवेचन से स्पष्ट है कि फणीश्वर नाथ रेणु ने मिथिलांचल के लोक में प्रचलित बहुत सी कलाओं, परम्पराओं एवं विष्वासों को अपनी कहानियों एवं उपन्यासों न केवल जस-का- तस प्रस्तुत किया है, वरन ऐसा कर उन कलाओं को सदियों तक के लिए संरक्षित भी किया है। रेणु की ख्याति आंचलिक कथाकार के रूप में है लेकिन आंचलिक कथाकार होने के साथ- साथ लोक जीवन के मर्मज्ञ रसचेतना से सम्पन्न कलाकार भी है। आपने अपनी कहानियों एवं उपन्यासों के माध्यम से लोक में फैले उस ज्ञान राशि को बचाया है, जिसकी आज के वैश्विक समय में सहज जीवन यापन की आवश्यकता है।
Download
Pages:7-9
How to cite this article:
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. दीपशिखा श्रीवास्तव "फणीश्वर नाथ रेणु कहानियाँ एवं भारतीय ज्ञान परम्परा (लोक कला एवं संस्कृति के विशेष सन्दर्भ में)". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 5, Issue 2, 2024, Pages 7-9
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

