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VOL. 6, ISSUE 2 (2025)
खड़ी बोली साहित्य का इतिहास दर्शन
Authors
डॉ. अनिरुद्ध कुमार
Abstract
इतिहास किसी राष्ट्र का लिखा जाय या भाषा-साहित्य का उसमें एक सुचिंतित इतिहास दृष्टि अवश्य होती है। हिंदी साहित्य का इतिहास लिखने के पीछे भी विधेयवादी और मार्क्सवादी दृष्टि की छाप दिखाई पड़ती है। खड़ी बोली का इतिहास अनिवार्य रूप से हिंदी साहित्य में शामिल रहा है। ऐसे में हिंदी साहित्य का इतिहास की इतिहास दृष्टि से सबक लेकर खड़ी बोली का इतिहास दर्शन निश्चित करना सर्वथा उपयुक्त है। यह इतिहास दर्शन विधेयवाद, मार्क्सवाद या संरचनावाद के इतिहास दर्शन के आधार पर लिखे जाने के बजाय सभी की विशेषताएं अपनाकर तथा अतिवादों से बचते हुए लिखा जाना चाहिए।
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Pages:19-21
How to cite this article:
डॉ. अनिरुद्ध कुमार "खड़ी बोली साहित्य का इतिहास दर्शन". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 6, Issue 2, 2025, Pages 19-21
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