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VOL. 6, ISSUE 2 (2025)
चरण सिंह पथिक की कहानियों में किसान दुर्दषा का चित्रण
Authors
अशोक कुमार, डॉ रामकृष्ण शर्मा
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र में चरण सिंह पथिक की कहानियों में चित्रित किसान जीवन की दुर्दशा का यथार्थ विश्लेषण किया गया है। स्वतंत्रता पूर्व ग्रामीण किसान जमीदार, सेठ-साहुकार के शोषण, अत्याचार एवं बेगार का शिकार था। आज किसान सरकारी भ्रष्टाचार तथा सरकार की गलत नीतियों, पूंजीवादी निजी कंपनियों से त्रस्त है। किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा महंगाई से परेशान है। किसान कर्ज के जाल में फंसकर आत्महत्या जैसे जघन्य कदम उठा लेता है। गरीब किसान को कर्ज के कारण अपनी कृषि भूमि से हाथ धोना पड़ता है। जमींदार तथा धनाढ्य लोगों की दृष्टि उसकी जमीन पर रहती है। किसान के खेत में जब उपज अच्छी रहती है तो उपज के भाव कम हो जाते है। किसान अपनी गरीब तथा लाचार स्थिति को जीने के लिए मजबूर है। कहानीकार किसानों की स्थिति में सुधार के लिए आवाज उठाता है।
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Pages:17-18
How to cite this article:
अशोक कुमार, डॉ रामकृष्ण शर्मा "चरण सिंह पथिक की कहानियों में किसान दुर्दषा का चित्रण". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 6, Issue 2, 2025, Pages 17-18
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