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VOL. 7, ISSUE 3 (2026)
मुक्तिबोध की कविताओं में गांधी के बिम्ब
Authors
डॉ. श्याम शंकर सिंह
Abstract
भारतीय राजनीति में गांधीजी के आगमन के साथ एक नए युग की शुरुआत होती है। गांधी जी ने अपने जीवन को प्रतिमान बनाकर मूल्य युक्त जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन का स्वरूप तो दिया ही, सत्याग्रह पर सर्वाधिक जोर दिया और इसे उन्होंने राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अनिवार्य साधन भी माना। उन्होंने जो मूल्य सृजन किये और जो अपने जीवन के माध्यम से संदेश दिया, उसका प्रभाव भारतीय भाषाओं के साहित्य पर अनिवार्य रूप से पड़ा। उन्हीं के व्यक्तित्व को केंद्रित करके उसे युग के भारतीय साहित्य को 'सत्याग्रहयुगीन भारतीय साहित्य' के रूप में पहचाना जाता है। भारतीय साहित्य में गांधीवादी मूल्यों का प्रभाव स्वाधीनता संग्राम के दौरान बहुत ही प्रभावशाली रूप में दिखाई दिया, स्वाधीनता के बाद भी गांधी जी की आभा ने भारतीय साहित्यकारों को प्रभावित किया- विशेष कर नेहरू युग के दौरान! हिंदी में मुक्तिबोध भी उसी दौर में साहित्य सृजन कर रहे थे। वे मूलत: मार्क्सवाद के सिद्धांतों से प्रभावित थे, लेकिन उन्होंने अपने समय में गांधी जी के प्रभाव को देखा और महसूस किया था। वह उनके राजनीतिक कार्यों से, सामाजिक कार्यों से बहुत प्रभावित थे। यह प्रभाव उन पर आखिरी समय तक बना रहा। उनकी अंतिम लंबी महाकाव्यात्मक नाटकीय संरचना वाली कविता 'अंधेरे में' भी गांधी जी का बिंब भावपूर्ण शब्दों में रचित है। ‘भारतीय इतिहास और संस्कृति’ पुस्तक में भी गांधी जी के अवदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। उनके पूरे रचना काल में गांधी जी का उल्लेख किसी न किसी प्रसंग में आता रहा। मुक्तिबोध के साहित्य में उल्लिखित प्रसंगों के आधार पर प्रस्तुत आलेख की रचना की गई है। इससे तत्कालीन भारतीय राजनीति के कुछ विशेष रूप व्यंजित होते हैं। इस दृष्टि से कविताओं से एक राजनीतिक इतिहास की छवि बनती हुई दिखती है। यह आज भी प्रासंगिक है।
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Pages:11-14
How to cite this article:
डॉ. श्याम शंकर सिंह "मुक्तिबोध की कविताओं में गांधी के बिम्ब". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 7, Issue 3, 2026, Pages 11-14
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