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Sanskritik aur Samajik Anusandhan
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VOL. 2, ISSUE 2 (2021)
समकालीन कविता: जीवन के आयामों का आइना
Authors
डॉ. रॅाय जोसफ
Abstract
समकालीन कविता अपनी निरंतरता से गतिशील है। समकालीन परिदृश्य में रचना की अनेक सरणियों का विकास हुआ। समकालीन कविता का कैनवास बहुत ही विशाल है। उसमें जीवन के बहुमुखी अनुभव-खण्ड पिरोये गए है। विशाल अनुभव फलक होने के कारण कविताओ के क्षितिंज बहुत दूर-दूर तक फैले हुए है। समकालीन कविता के सकारात्मक पक्षों ने मनुष्य संवेदना की रक्षा का काम किया है। कविता हमारे प्रश्नों का समाधान नहीं करती। वह हमारी चेतना में प्रश्न-दर-प्रश्न पैदा कर रही है। हमारा समकालीन कवि इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहा है एवं उसका सही सबक देने केलिए प्रण लेकर प्रस्तुत है।
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Pages:24-28
How to cite this article:
डॉ. रॅाय जोसफ "समकालीन कविता: जीवन के आयामों का आइना ". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 2, Issue 2, 2021, Pages 24-28
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