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VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
साठोत्तरी हिन्दी काव्य में सामाजिक चेतना
Authors
डॉ. बबीता तंवर
Abstract
साहित्य और समाज का अटूट संबंध माना जाता है। साठोत्तरी हिंदी कविता इस इस भाव सत्य से अलग नहीं है। इसमें समाज के ताने-बाने, सामाजिक विषमताओं, विसंगतियों तथा विद्रूपता का जीवंत चित्रण हमें देखने को मिलता है। इसमे एक तरफ जहां आर्थिक शोषण करने वाले वर्ग के लोगों का विरोध किया है वही दूसरी तरफ किसान जैसे सामान्य व्यक्ति के प्रति संवेदना का भाव भी देखने को मिलता है। आज भौतिकवादी समाज में व्यक्ति तनावपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहा है जिससे उसे अनेक पारिवारिक सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है संबंध विच्छेद की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जो समाज के लिए घातक है। साठोत्तरी कवि ने इसी समस्या को पहचान कर उसे अपना वरेण्य विषय बनाया।साठोत्तरी कविता व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं को अपने कलेवर में समाहित किए हुए हैं जो समाज को सही दिशा और दशा प्रदान करती है ताकि समाज मे लोगों का जीवन के स्तर को ऊंचा हो सके। साठोत्तरी कवि समाज में विभिन्न प्रसंग और संदर्भों के माध्यम से सामाजिक चेतना लाने के पक्षधर हैं। विभिन्न परिस्थितियों का वर्णन करने के पीछे इनका प्रयोजन यही है कि लोगों का जीवन स्तर ऊंचा हो सके, साथ ही सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बना रहे। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि साठोत्तरी हिंदी कविता मे सामाजिक चेतना अनेक रूपों में व्यक्त हुई है।
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Pages:8-11
How to cite this article:
डॉ. बबीता तंवर "साठोत्तरी हिन्दी काव्य में सामाजिक चेतना". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 8-11
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