Logo
Sanskritik aur Samajik Anusandhan
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 1 (2023)
साहित्य सर्जक की अनुभूतियों पर उसके व्यक्तित्व और परिस्थितियों का प्रभाव
Authors
डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव
Abstract
साहित्य का निर्माण सर्जक की साधना है, सर्जक या रचनाकार जब अपनी अनुभूतियों की बलवती चेतना से प्रभावित और विवश होता है तो यह अनुभूति सर्जना के रूप में सामने आकर उसकी संवेदना को आकर देती है. और यह आकर निर्माण के विभिन्न रूपों में समाज के सामने आता है. वस्तुतः अनुभूति सर्जक की होती है परन्तु जब वह कोई रूप लेकर समाज के सामने आती है तो वह समाज की हो जाती है. इस सृजन पर सर्जक का दावा पूर्ण रूपेण नहीं रह पाता. उसका एकाधिकार समाप्त हो जाता है. सृजन में उसकी सोच उसकी कृति को उसके अनुसार रचने या गढ़ने का काम करती है. उस सृजन का उचित निर्धारण उस समय के समाज के साथ आनेवाला युग भी करता है और उसकी कालजयिता और प्रासंगिकता का निर्धारण भी करता है. इस कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही उस सृजन का सही मूल्य निश्चित हो पाता है जिसमे अहम् भूमिका युग के मनीषियों की होती है.
Download
Pages:23-25
How to cite this article:
डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव "साहित्य सर्जक की अनुभूतियों पर उसके व्यक्तित्व और परिस्थितियों का प्रभाव". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 4, Issue 1, 2023, Pages 23-25
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.