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VOL. 5, ISSUE 1 (2024)
सांस्कृतिक विविधताओं एवं विशेषताओं की प्रतीक हरियाणवी लोरियां
Authors
महासिंह पूनिया
Abstract
हरियाणा एक सांस्कृतिक प्रदेश है। इस प्रदेश की परम्परा एवं सांस्कृतिक विविधताएं यहां की सांस्कृतिक विरासत का परिचयक है। लोरी वह संगीतात्मक एवं ध्वन्यात्मक अभिव्यक्ति है जिसके माध्यम से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तो होती ही है इसके अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक प्रमाण भी प्रस्तुत होते हैं। लोरी वे गीत हैं जो स्त्रियाँ छोटे बच्चों को सुलाने के लिए गाती हैं, वास्तव में लोरी गीत माँ बच्चे को सुलाने के लिए हल्की आवाज में गाती है। लोरी हरियाणवीं लोकजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोरियों से जहां एक और बच्चों में एक संस्कारों का समावेश होता है, वहीं पर दूसरी ओर आँचलिक संस्कृति की अभिव्यक्ति भी होती है। हरियाणवीं लोरियों में अनेक विशेषताएँ विद्यमान हैं। जिनको हरियाणवीं लोरियों की आत्मा कही जा सकती हैं। इस प्रकार हरियाणवी लोरियां सांस्कृतिक विविधताओं एवं विशेषताओं की परिचायक हैं। लोक सांस्कृतिक दृष्टि से लोरियां मनोवैज्ञानिक वह गीत हैं जिनको महिलाएं अपने बच्चों को सुलाने के लिए प्रयोग में लाती हैं। वास्तव में आंचलिक संस्कृति का यह वो खजाना है जिसके माध्यम से लोक सांस्कृतिक परम्पराओं में छिपे हुए लोरी गीतों की अभिव्यक्ति होती है। हरियाणा के अंचल में अनेक प्रकार की लोरियां गाई जाती रही हैं। इन लोरियों की विशेषताओं में विविधात्मकता, भावनात्मकता, मनोरंजनात्मकता, संगीतात्मकता, गेयात्मकता, काल्पनिकता, नाट्यकीयता, लोकविश्वासनीयता, आंचलिकता, ध्वन्यात्मकता, तुकान्तता, सौम्यता, मनोवैज्ञानिकता, समन्वयता एवं प्रतीकात्मकता आदि शामिल हैं।
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Pages:14-15
How to cite this article:
महासिंह पूनिया "सांस्कृतिक विविधताओं एवं विशेषताओं की प्रतीक हरियाणवी लोरियां". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 5, Issue 1, 2024, Pages 14-15
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