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VOL. 7, ISSUE 1 (2026)
बौद्ध दर्शन के विभिन्न निकाय: एक अध्ययन
Authors
मुनीम सिंह
Abstract
बौद्ध धम्म के प्रवर्तक तथागत बुद्ध है। इनका जन्म ईसा की छठी शताब्दी पूर्व हुआ था। तथागत बुद्ध के निर्वाण के पश्चात् बौद्ध संघ भिक्षुओं के विभिन्न समूहों में या विचारधाराओं में बट गया जिन्हें निकाय कहा गया। सम्राट अशोक के काल में बौद्ध सम्प्रदाय अष्टादश निकाय के नाम से बौद्ध ग्रन्थों में प्रसिद्ध है। बौद्ध धम्म में निकाय शब्द का प्रयोग एक बड़े ग्रन्थ समूह या बौद्ध धम्म की भिन्न-भिन्न परम्पराओं दोनों के लिए किया जाता है जो मुख्य रूप से ’समूह’ या ’संग्रह’ अर्थ से जुड़ा है। यह निकाय शब्द मूल रूप से त्रिपिटक का एक भाग ’सुत्तपिटक’ के पाँच प्रमुख संग्रहों दीघ निकाय, मज्झिम निकाय, संयुक्त निकाय, अंगुत्तर निकाय तथा खुद्दक निकाय के लिए प्रयोग किया जाता है। निकाय शब्द का प्रयोग बौद्ध धम्म में विभिन्न मठों या सम्प्रदायों के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इन निकायों का अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव था। प्रत्येक निकाय का अपना एक अलग सिद्धान्त था। उभरते समय के साथ-साथ महायान सम्प्रदाय से अनेक नवीन तन्त्र निकायों ने जन्म लिया। इनके अनुसार बुद्धत्व व निर्वाण को सरलता व शीघ्रता से प्राप्त किया जा सकता है। तन्त्र-मन्त्र के प्रवेश ने बौद्ध धम्म में अवतारवाद व अडम्बरों ने जन्म लिया जो बाद में बौद्ध धम्म के पतन का कारण बना। महायान सम्प्रदाय अनेक निकायों में विभाजित होने के कारण भी उसका मुख्य सिद्धान्त शून्यता या अद्वैत ही रहा। महायान बौद्ध सम्प्रदाय में सृष्टि की शून्यता पर जोर दिया गया है।
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Pages:5-10
How to cite this article:
मुनीम सिंह "बौद्ध दर्शन के विभिन्न निकाय: एक अध्ययन". Sanskritik aur Samajik Anusandhan, Vol 7, Issue 1, 2026, Pages 5-10
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